टॉपरों का 'लल्लन टॉप बाप', बेटी को बिना परीक्षा दिए बना दिया टॉपर, खुल गया भेद


टॉपरों का 'लल्लन टॉप बाप', बेटी को बिना परीक्षा दिए बना दिया टॉपर, खुल गया भेद

By: deepak
10 Jun 2016
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पटना [काजल]। एक थे नटवरलाल, जिनकी चालाकी की आज भी लोग मिसाल दिया करते हैं लेकिन बिहार के उस मिस्टर नटवरलाल को भी फेल कर दिया है इस नटवरलाल ने जिससे बिहार में फर्जीवाड़े के लिए मशहूर इस शख्स का डंका आज बज रहा है और बिहार की छवि धूमिल हुई है।

जी हां..हम बात कर रहे उस नटवर लाल की जिसकी चर्चा आज पूरे देश में हो रही है और वो हैं विशुनराय कॉलेज के प्रिंसिपल बच्चा राय, जिन्होंने अपने शातिर दिमाग की बदौलत जाने कितने फर्जी टॉपरों का भविष्य बनाया। दूसरों को तो लल्लन टॉप बनाते रहे थे लेकिन इस साल अपनी बेटी को बिना बारहवीं की परीक्षा दिए ही साइंस में टॉपर बना दिया । इसे कहते हैं लल्लन टाप, टॉपरों का बाप।

कैसे कैसे छात्रों को इस साल बनाया टॉपर

पॉलिटिकल साइंस को प्रॉडिकल साइंस और उसमें खाना बनाना सिखाया जाता है एेसा बताने वाली रूबी राय को आर्ट्स का टॉपर बना दिया तो साइंस के मामूली सवालों की जानकारी नहीं रखने वाले सौरभ श्रेष्ठ को साइंस टॉपर बना दिया। इसके अलावे भी कितनों को टॉप कराया।

लेकिन जब खुलासा हुआ तो पता चला कि जिस सौरभ श्रेष्ठ को अब तक साइंस का टॉपर माना जा रहा था वो तो बेचारा सेकेंड टॉपर निकला, जबकि घर बैठे ही पूरे बिहार में साइंस में टॉप करने वाली बच्चा राय की बेटी फर्स्ट साइंस टॉपर थी। इसे कहते हैं 'लल्लन टॉप', टॉपरों का बाप, जो बेटी को बिना परीक्षा दिलवाए ही करा दिया साइंस टॉप।

बिहार की पूरी शिक्षा प्रणाली का बाप

विशुनराय कॉलेज के प्रिंसिपल बच्चा राय के फर्जीवाड़े की उसके दिमाग की जितनी तारीफ की जाए कम है।इसमें शायद किसी और की गलती नहीं पूरे बिहार की शिक्षा प्रणाली का ही दोष है। बच्चा सिंह सिर्फ अपनी लाडली बेटी का नहीं घोटालों का, जालसाजी, फर्जीवाड़े का बाप है और वर्षों से बेरोक-टोक इस धंधे में लगा हुआ था।

शातिर दिमाग की करामात

शातिर दिमाग एेसा कि वर्षों से यह गोरखधंधा चला रहा था लेकिन पकड़ में नहीं आ रहा था। टॉपरों को पैसा लेकर टॉप कराने की बात तो गले उतरती है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी इम्तेहान में कोई टॉप करे और उस टॉपर को जमाने से छुपा दिया जाए?

जब पुलिस ने खंगाला तो पता चला कि बच्चा राय अपनी बेटी को बिना परीक्षा दिलाए ही टॉपर बनाने की जुगत लगाया था और ये बात किसी को पता भी नहीं चलती। पुलिस के पास इसकी एफआईआर की कॉपी है जिसमें सबसे ऊपर ये नाम लिखा है- शालिनी राय. रोल नंबर 33014/10106, इंटर साइंस में प्रथम स्थान, यानी साइंस टॉपर।

बेटी को टॉपर बनाने का कैसेे बनाया प्लान

पुलिस के पास मौजूद एफआईआर में जिसमें बच्चा राय की बेटी शालिनी राय के साइंस टॉपर होने के दस्तावेज हैं ये एफआईआर इस बात का भी सबूत है कि बच्चा राय जैसे लोग कैसे बिहार शिक्षा बोर्ड के बाप बने हुए हैं। उसने दो साल पहले बेटी को दसवीं के इम्तेहान में पूरे बिहार में टॉप कराया और अब बारहवीं में भी बेटी को टॉपर बनाने का प्लान कर डाला।

बच्चा राय ने इसके लिए अपनी बेटी शालिनी राय की कॉपी का नंबर बदलवा दिया और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगने दी कि उसकी बेटी ने ही साइंस में टॉप किया है। प्लान के तहत उसने सौरभ श्रेष्ठ को साइंस का टॉपर बना कर अपनी बेटी के नतीजे को छुपा लिया। एफआईआर में साफ-साफ लिखा है कि बच्चा राय की बेटी शालिनी राय का कॉपी नंबर फाड़ दिया गया और उसकी जगह दूसरा नंबर चिपका दिया गया।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सख्ती ने किया भंडाफोड़

जब इस बात की हवा उड़ी और मामले की बात खुली तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आंख तरेरी और कहा कि इस मामले की संजीदगी से तहकीकात की जानी चाहिए और जो भी आरोपी होंगे उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए फिर क्या था? पुलिस ने बच्चा राय से लेकर बोर्ड अध्यक्ष तक की पोल खोलकर रख दी। एसआइटी की टीम बनी और आज वर्षों से चले आ रहे इस घोटाले के सभी मुख्य आरोपी जान बचाकर फरार हैं।

एसआईटी की एफआईआर में फिलहाल चार छात्रों को गलत तरीके से टॉप करने के लिए नामजद किया गया है।इनमें शालिनी राय के अलावा, सौरभ, राहुल कुमार और रूबी राय का नाम है। एफआईआर में साइंस की टॉपर शालिनी के बाद टॉपर नंबर दो यानी सौरभ के बारे में कहा गया है कि उसकी योग्यता और उसकी कॉपी में जमीन-आसमान का फर्क था। सौरभ इसलिए टॉप किया क्योंकि या तो उसकी कॉपी बदली गई या फिर कोई और गड़बड़ी हुई।

बच्चा राय की गिरफ्तारी से खुलेंगे कई राज

रिजल्ट घोटाले में कोई एक-दो लोग नहीं इसके तार बहुत उपर तक जुड़े बताए जा रहे हैं। अब इंतजार इस बात का हेै कि इस गिरोह के हर शख्स को अगर कोई बेनकाब कर सकता है तो वो है विशुनराय कॉलेज का प्रिंसिपल बच्चा राय। अगर बच्चा राय ने सारा सच उगल दिया तो बिहार के लल्लन टॉप बनाने वाले टॉपरों की भी सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

बच्चा राय के नाम अनोखा रिकॉर्ड, 19 की उम्र में बन गया प्रिसिंपल

बच्चा राय ने 1994 में दसवीं का इम्तेहान पास किया था, लेकिन बारहवीं में दो बार फेल कर गए। फिर तीसरी बार 1998 में इन्होंने अपने पिता के इसी विशुनराय कलेज से इम्तेहान दिया और फर्स्ट डिवीजन से पास कर गए।

खुद लल्लन टॉप रहे बच्चा राय ने 1999 में अचानक उसी कॉलेज के प्रिंसिपल बन गए और तब इनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी। फिर प्रिंसिपल बनने के बाद इनके नटवरलाल दिमाग ने ऐसा जादू दिखाया कि ये स्कूल टॉपर निकालने की खान बन गये। विशुनराय कॉलेज में दाखिले का मतलब ही था टॉपर नहीं तो डिस्टिंकशन नंबर के साथ वरना फर्स्ट डिवीजन से पास की तो गारंटी है ही।

2007 में पहली बार विशुनराय कॉलेज को लोगों ने जाना

इस कॉलेज में गड़बड़ी का मामला सबसे पहले 2007 में सामने आया था, तब अचानक यहां के छात्रों का रिजल्ट पूरे बिहार को आईना दिखाने लगा था। उसके बाद तो कॉलेज ने कभी पीछे मुड़ कर ही नहीं देखा। दो साल पहले तक टॉपर बनाने का कॉलेज का तरीका बड़ा सीधा-सादा सा था।

तब इम्तेहान के दौरान ही परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को नकल करा कर टॉप कराया जाता था। इसके लिए या तो जवाब पहले से तैयार होते थे या फिर कोई स्कॉलर छात्रों को जवाब लिखाता था। बहुत से छात्रों को तो परीक्षा केंद्र भी जाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। उनकी जगह उन्हीं के नाम से दूसरा स्कॉलर कापी लिख आता था।

आज बिहार को शर्मसार किया इस कॉलेज ने

बिहार को टॉपर्स दिलाने वाले कॉलेज की काली सच्चाई आज सबके सामने है, जिसने पूरे बिहार के नाम पर कलंक का टीका लगा दिया है। जिस बिहार के मेधा की चर्चा पूरी दुनिया में होती है आज उसी बिहार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है। जिन लोगों ने बिहार के दामन को दागदार बनाया है उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।